प्रेमानंद महाराज जी का जीवन परिचय (Bio Graphy) – संपूर्ण जानकारी

स्वागत है दोस्तों आपका आज के हमारे एक और नए आर्टिकल में। तो दोस्तों हमारे हिंदू धर्म में या फिर कहें कि हमारे भारत में न जाने कितने साधु-संत रहते हैं, जिन्होंने अपने चमत्कार और अपने आचरण से कई लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया है। वैसे तो आजकल कई ढोंगी साधु संत और बाबा ऐसे ही घूमते रहते हैं, जिनकी वजह से वे लोग जो कि सच में भगवान को मानते हैं, और पूरी श्रद्धा से भगवान की सेवा करते हैं, उन्हें भी लोग गलत समझते हैं। आज भी भारत में ऐसे कई ऋषि मुनि और महराज हैं, जो कि सच्चे मन से भगवान की पूजा करते हैं, और उनकी आराधना करते हैं। 

तो आज के इस आर्टिकल में हम आपको हमारे भारत के एक ऐसे ही महाराज, जिन्हें कि हम प्रेमानंद जी महाराज के नाम से जानते हैं, उनके बारे में बताने वाले हैं। हम आपको बता दें कि प्रेमानंद जी महाराज को हम पीले बाबा के नाम से भी जानते हैं, यह वृंदावन के एक ऐसे महाराज हैं, जो कि राधा रानी के बहुत बड़े भक्त हैं। कहा जाता है कि अगर कोई भक्त इनके प्रवचन को ध्यान लगाकर सुने, तो उसे भी राधा रानी के दर्शन हो जाते हैं। अगर यह सच है, तो आपको भी इनके जीवन के बारे में जानना चाहिए, क्योंकि उनका जीवन बहुत ही ज्यादा कठिनाइयों से गुजरा है।

आज के इस आर्टिकल  के माध्यम से हम आपको प्रेमानंद जी महाराज की पूरी जीवनी के बारे में बताने वाले हैं, कि उनका जन्म कब और कहां हुआ। उनकी शिक्षा कहां हुई, और वह सन्यासी कैसे बने। अगर आपको भी महाराज जी के बारे में इन सभी बातों को जानना है, तो इस आर्टिकल को आखिरी तक जरूर पढ़ें। तो चलिए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं प्रेमानंद जी महाराज की जीवनी, यानी की बायोग्राफी के बारे में।

प्रेमानंद जी महाराज का जन्म (Premanand ji Maharaj ka Janam Kab Hua)

दोस्तों अगर बात करें प्रेमानंद जी महाराज का जन्म कब और कहां हुआ था, तो हम आपको बता दें कि प्रेमानंद जी महाराज का जन्म हमारे भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के अंदर कानपुर में हुआ था। इनका जन्म एक बहुत ही ज्यादा गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ था, हम आपको बता दें की बचपन से ही इनका नाम प्रेमानंद नहीं था, बचपन में इनका नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। अगर बात करें इनके पिता जी के नाम की, तो उनके पिता जी का नाम शंभू पांडे, और उनकी माता जी का नाम श्रीमती रामादेवी था। जैसा कि हमने आपको बताया कि प्रेमानंद जी का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में ही हुआ था, तो हम आपको यह भी बता दें कि प्रेमानंद जी महाराज के पिता व उनके दादा दोनों ही संत थे, ब्राह्मण समाज होने के कारण अक्सर उनके घर में संत एवं ऋषि मुनियों का आना-जाना लगा रहता था, अक्सर घर में संत ऋषि मुनियों के आने जाने तथा उनके मुख से सत्संग आदि सुनकर बचपन से ही प्रेमानंद जी को इन सभी चीजों में रूचि हो गई थी। बचपन से ही वह दिन में 10 से 15 चालीसा का पाठ किया करते थे, और भक्ति में ही लीन रहते थे, क्योंकि इनके दादा संत थे और इनके पिता जी भी संत है, इसलिए यह चाहते थे कि यह भी संत बने। तो चलिए आगे बढ़ते हैं और आपको इनकी प्रारंभिक जीवन के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।

प्रेमानंद महाराज जी का परिवार ( Premanand ji Maharaj Ka Parivar)

तो दोस्तों अगर बात करें प्रेमानंद महाराज जी के परिवार की, तो हम आपको बता दें की प्रेमानंद महाराज जी का परिवार बहुत ही ज्यादा शांत परिवार था, क्योंकि यह सभी ब्राह्मण समाज के थे, उनके परिवार में सभी संत मुनि थे, प्रेमानंद महाराज जी के दादा जो कि हमेशा सादा जीवन बिताना पसंद करते थे, जो की एक संत सन्यासी थे, जिसके बाद प्रेमानंद महाराज जी के पिता जी ने भी संत बनने का फैसला लिया। अगर बात करें प्रेमानंद महाराज जी की माता की तो हम आपको बता दें कि उनकी माता जी भी बहुत ही ज्यादा पवित्र थी। वह सभी संत एवं साधुओं का सम्मान किया करती थी, कुल मिलाकर कहे, तो प्रेमानंद जी का परिवार पूरी तरह से आध्यात्मिक जीवन पर आधारित था, जहां का वातावरण बहुत ही ज्यादा निर्मल और मधुर था, इसी वातावरण के वजह से बचपन से ही प्रेमानंद जी महाराज के मन में इन सभी चीजों के प्रति रुचि जागी, जो कि समय के साथ बढ़ती गई, जिसके कारण उन्होंने 13 वर्ष जैसी छोटी उम्र में अपने घर को त्याग कर सन्यासी जीवन जीने का फैसला किया।

प्रेमानंद महाराज जी का प्रारंभिक जीवन (Premanand ji Maharaj Ki Life)

तो दोस्तों जैसा कि हमने आपको यह पहले ही बता दिया है, कि एक ब्राह्मण समाज में जन्म लेने के कारण हमेशा प्रेमानंद जी के घर में ऋषि मुनियों और संत लोगों का आना-जाना लगा रहता था, जिससे कि प्रेमानंद जी के अंदर भी आध्यात्मिक भाव उत्पन्न होने लगे थे, और उनके मन में भी यह विचार आने लगा था कि वह भी संत बन जाए। हम आपको बता दें कि जब यह पांचवी कक्षा में थे, तभी से इन्होंने श्रीमद् भगवत गीता का पाठ करना शुरू कर दिया था। जब यह नवी कक्षा में आए, तब इन्होंने सोचा कि जब एक-एक करके मेरे घर के सारे सदस्यों की मृत्यु हो जाएगी, तब मेरा क्या होगा? मैं कहां रहूंगा, मेरा ध्यान कौन रखेगा, मुझे किसका सहारा होगा, जिसके बाद इन्हें स्वयं ही उनके सवाल का जवाब मिल गया, कि इस दुनिया में अपना कोई नहीं, सिर्फ और सिर्फ भगवान ही हमारा साथी होता है, तभी से प्रेमानंद जी महाराज ने ठान ली कि अब वह इस मोह माया से दूर जाकर संन्यास लेकर बाबा बनेंगे। इसके बारे में प्रेमानंद जी महाराज ने अपने माता से भी बात की, और कहा कि माता अब मैं संन्यास लेना चाहता हूं, और एक बाबा बनना चाहता हूं। एक बच्चे के मुंह से ऐसी बात को सुनकर माता ने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, और अपने काम पर व्यस्त हो गई। उसके अगले दिन ही प्रेमानंद जी महाराज जिनकी आयु उस समय 13 वर्ष ही थी उन्होंने ठान लिया कि अब वह संन्यास लेंगे, और एक संत बाबा के रूप में अपना जीवन यापन करेंगे। इसके बाद उन्होंने सिर्फ 13 वर्ष की उम्र में ही अपने घर का त्याग कर दिया, और एक संन्यासी जीवन यापन करने का फैसला लिया।

प्रेमानंद जी महाराज का सन्यासी जीवन (Premanand ji Maharaj Ka Sanyasi Jeevan)

कहा जाता है कि जब प्रेमानंद जी ने 13 वर्ष की उम्र में अपने घर का त्याग किया, और संन्यास लेने का फैसला लिया, तब साक्षात शिव जी ने इन्हें अपने दर्शन दिए थे, जिसके बाद उन्होंने ठान लिया कि अब तो इन्हें आगे का जीवन भक्ति करके ही गुजारना है, जिसके लिए इन्होंने वाराणसी आने का फैसला किया। हम आपको बता दें कि संन्यास के समय इनका नाम बदलकर आरयन ब्रह्मचारी रख दिया गया था। जिसके बाद यह वाराणसी आए, और प्रतिदिन गंगा नदी में तीन बार स्नान किया करते थे, और तुलसी घाट पर बैठकर भगवान शिव और गंगा माता की आराधना करके कड़ी तपस्या किया करते थे। इतना ही नहीं, यह दिन में केवल एक बार ही भोजन किया करते थे, जिसके लिए यह लोगों से भिक्षा मांगते थे। जिसके लिए यह सिर्फ 10 से 15 मिनट इंतजार करते थे, अगर कोई इन्हें खाने के लिए कुछ दे देता, तो ठीक, अगर कोई नहीं देता, तो यह सिर्फ गंगा का पानी पीकर ही भूखे पेट भगवान की भक्ति करते, और अपना जीवन यापन करते थे।

प्रेमानंद जी महाराज ने स्वयं बताया है, कि जब वे भगवान की भक्ति किया करते थे, तब उन्हें कई दिनों तक भूखा रहना पड़ा था। ऐसे ही भगवान शिव के ध्यान में लगे हुए बिना ठंड और गर्मी का ध्यान करते हुए, शिव जी की आराधना करने के बाद आखिर कई वर्षों की कठिन तपस्या के बाद बाबा को शिव जी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ, कहा जाता है कि उनके ऊपर शिव जी की विशेष कृपा है।

प्रेमानंद जी महाराज का वृंदावन आगमन (Premanand ji Maharaj Vrindavan Kab Aye)

कहां जाता है कि प्रेमानंद जी महाराज का वृंदावन आने के पीछे भी एक चमत्कार की एक कहानी है, कहा जाता है कि एक दिन प्रेमानंद जी महाराज भगवान का ध्यान कर रहे थे, तभी उनसे मिलने के लिए एक ऐसे साधु आए, जिन्हें की प्रेमानंद जी महाराज नहीं जानते थे, उस साधु ने प्रेमानंद जी महाराज से कहा, कि हनुमत धाम विश्वविद्यालय काशी में श्रीराम शर्मा जी के द्वारा दिन में चैतन्य महाप्रभु लीला और रात को रासलीला का आयोजन किया गया है, जिसमें आप सादर आमंत्रित है। क्योंकि प्रेमानंद जी महाराज को एकांतवास में रहना ही पसंद था, इसलिए उन्होंने उस साधु के साथ वृंदावन जाने हेतु मना कर दिया। लेकिन साधु भी महाराज जी से बहुत ही ज्यादा आग्रह करने लगा, कि कृपया आप मेरे साथ वहां चले, यह रासलीला पूरे 1 महीने तक चलने वाली है, इसमें आपको बहुत ही ज्यादा आनंद आएगा।

साधु की इतना ज्यादा आग्रह करने के बाद प्रेमानंद जी महाराज उस साधु के साथ जाने हेतु मान गए, जिसके बाद जब प्रेमानंद जी वृंदावन आए और उन्होंने दिन में चैतन्य लीला और रात को रासलीला देखी, तो उन्हें उसमें बहुत ही ज्यादा आनंद आया। उन्हें उसमें इतना ज्यादा आनंद आया, कि वह रोज उसमें भाग लेने लगे, और एक महीना कब बीत गया उन्हें पता ही नहीं चला। एक महीना बीतने के बाद प्रेमानंद महाराज जी को आभास हुआ कि अब तो रासलीला खत्म हो गया है, अब मैं अपना जीवन यापन कैसे करूंगा, मैं तो इसके बिना रह नहीं सकता, इसके बाद प्रेमानंद जी ने उस साधु से मदद मांगी, जिन्होंने उन्हें इस रासलीला के लिए आमंत्रित किया था, उन्होंने उनसे कहा कि आप मुझे अपने साथ ले चलिए मुझे रासलीला देखना है, बदले में मैं आपकी जीवन भर सेवा करुंगा। जिसके बाद साधु ने महाराज जी से कहा, कि आप मेरे साथ वृंदावन आ जाइए, वहां आपको रोज रासलीला देखने को मिलेगा। साधु के इस बात को सुनकर प्रेमानंद जी उस साधु के साथ ही वृंदावन आ गए।

कहां जाता है कि अपने भक्तिमाली के ही एक शिष्य नारायण दास की मदद से ही प्रेमानंद महाराज जी वृंदावन पहुंचे थे, जब वह वृंदावन आए थे, वह तब बहुत ही ज्यादा प्रसन्न थे, लेकिन वह किसी को भी नहीं जानते थे, सब उनके लिए अजनबी थे। तभी कहा जाता है कि वृंदावन के एक मंदिर में एक व्यक्ति ने उन्हें श्री राधा कृष्ण वल्लभ समुदाय में जाने को कहा था, जिसके बाद स्वामी जी ने अपना पूरा जीवन राधा कृष्ण के चरणों में अर्पित किया, और अपने सद्गुरु की 10 वर्षों तक सेवा की। इतना ही नहीं, वृंदावन आने के बाद महाराज का यह सपना था, कि वह वहां एक आध्यात्मिक संगठन की शुरुआत करें, और उन्होंने यह किया भी। उन्होंने वृंदावन में अपना स्वयं का एक आध्यात्मिक संगठन की स्थापना की, ताकि वह पूरे देश में भक्ति और शांति फैला सकें। आज के समय में प्रेमानंद महाराज जी अपने कार्यों के वजह से इतनी ज्यादा प्रसिद्ध हो गए हैं, कि सिर्फ हमारे देश से ही नहीं, बल्कि विदेश से भी लाखों की संख्या में लोग इनके सत्संग में प्रवचन सुनने के लिए यहां आते हैं। 

प्रेमानंद महाराज जी का स्वास्थ्य (Premanand ji Maharaj Ki Health Kaisi Hai Ab)

अब हम जो आपको बात बताने जा रहे हैं, शायद इसे जानने के बाद आपको आश्चर्य होगा और आपको विश्वास होने लग जाएगा कि जरूर प्रेमानंद महाराज जी के ऊपर शिव जी की विशेष कृपा है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि हम आपको बता दें कि प्रेमानंद महाराज जी की दोनों किडनी खराब है, फिर भी वह दो-तीन वर्ष नहीं बल्कि 19 वर्ष से पूरी तरह से स्वस्थ हैं, और पूरी तरह से भक्ति में लीन है। इतना ही नहीं, इनकी सबसे खास बात यह है, कि इन्होंने अपने दोनों खराब किडनीओं का नाम भी रखा हुआ है, जो कि इन के भक्ति भाव को प्रकट करता है। आज के समय में उनकी उम्र 60 वर्ष की है, लेकिन फिर भी उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या नहीं है। भले ही उनके दोनों किडनियां खराब हो, लेकिन भगवान की कृपा से वह भी पूरी तरह से स्वस्थ हैं, और उन्हें उनको इसका किसी भी प्रकार का दुख नहीं है। वैसे कभी-कभी किडनी के कारण उनका स्वास्थ्य खराब हो जाता है, लेकिन फिर भी वह भगवान का ध्यान करना नहीं भूलते, और भगवान की कृपा से पुन: ठीक होकर भक्तों के सभी प्रश्नों का उत्तर देकर उनका मार्गदर्शन करते हैं।

प्रेमानंद महाराज जी के कुछ चर्चित घटनाएं ( Premanand ji Maharaj Ke kuch famous ghatnaye)

वैसे तो प्रेमानंद महाराज जी आज के समय में बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध है, सोशल मीडिया में भी आप इनकी प्रसिद्धि के नजारे आसानी से देख सकते हैं। सोशल मीडिया में आपको इनके ऐसे कई सारे वीडियो देखने को मिल जाएंगे, जहां उनके आसपास लाखों की संख्या में लोग रहते हैं। जो कि उनके सत्संग प्रवचन और अपने सवालों का जवाब प्राप्त करने के लिए आए रहते हैं। तो अगर बात करें ऐसे ही प्रेमानंद महाराज जी के कुछ चर्चित घटनाओं में से एक की, तो हम आपको बता दें कि कुछ समय पहले विराट कोहली अपने पूरे परिवार यानी कि अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा और अपनी बेटी वामिका कोहली के साथ प्रेमानंद जी महाराज के पास आए थे, वह भी प्रेमानंद जी के दर्शन करने यहां आए थे, ताकि वह उनके प्रवचन और सत्संग सुन सकें। कहा जाता है कि महाराज जी ने विराट कोहली और अनुष्का शर्मा को पहचाना नहीं था, वहां के कुछ भक्तों ने उनसे महाराज जी का परिचय करवाया,, जिसके बाद महाराज जी ने विराट कोहली अनुष्का शर्मा और उनकी बेटी को आशीर्वाद दिया।

इसके अलावा एक और घटना है जब फेमस सिंगर बी प्राक भी प्रेमानंद महाराज जी से मिलने हेतु उनके आश्रम में गए, और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। सबसे पहले तो बी प्राक ने महाराज जी से मुलाकात की, उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया, और उसके बाद स्वयं वहां बैठकर राधा रानी के भजन गाए, जिसे कि महाराज जी ने शांतिपूर्वक सुना भी, और उनके साथ भजन का जाप भी किया। बी प्राक ने अपने इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया अकाउंट में पोस्ट भी किया है, जो कि बहुत ही ज्यादा वायरल हो रहा है, आप चाहे तो उनके अकाउंट में जाकर इस वीडियो को देख सकते हैं।

प्रेमानंद महाराज जी सोशल मीडिया संबंधी जानकारी (Premanand ji Maharaj Ji Social Media Related Information)

दोस्तों हम आपको बता दें कि भले ही प्रेमानंद महाराज जी सन्यासी है, लेकिन आज के समय में यह सोशल मीडिया में काफी ज्यादा फेमस हो गए हैं, आजकल आपको सोशल मीडिया में इनके कई सारे वीडियोस और पिक्चर देखने को मिल जाएंगे, जिसमें यहां भक्तों का कल्याण करते हुए नजर आते हैं। तो अगर आप भी इनको सोशल मीडिया में जाकर फॉलो करना चाहते हैं, तो नीचे हमने आपको इनके सोशल मीडिया अकाउंट्स के बारे में जानकारी दी है।

Instagram : https://www.instagram.com/vrindavanrasmahima/?hl=en 

Website : http://vrindavanrasmahima.com/ 

Facebook : https://www.facebook.com/VrindavanRasMahima?mibextid=ZbWKwL 

Conclusion

तो दोस्तों उम्मीद है कि अब आपको वृंदावन वाले महाराज प्रेमानंद महाराज जी के बारे में पूरी जानकारी हो गई होगी, जिन्हें कि हम पीले बाबा के नाम से भी जानते हैं। आज हमने आपको प्रेमानंद जी महाराज के जीवनी, उनके प्रारंभिक जीवन, सन्यासी जीवन, उनकी शिक्षा, परिवार, सभी के बारे में जानकारी प्रदान की है। अगर कुल मिलाकर इनके जीवन को देखा जाए, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि उनके ऊपर भगवान की कोई कृपा ही है, कि उन्होंने इतनी सारी परेशानियों के बाद भी अपनी भक्ति नहीं छोड़ी, और आज भी दो किडनी खराब होने के बाद भी लोगों का मार्ग दर्शन करने हेतु कार्य कर रहे हैं।

FAQ

1: कौन है प्रेमानंद महाराज जी के गुरु?

अगर बात करें प्रेमानंद महाराज जी के गुरु कौन है, तो हम आपको बता दें कि प्रेमानंद महाराज जी के गुरु, गोविंद शरण जी हैं, जिनकी सेवा के लिए प्रेमानंद महाराज जी तत्पर आगे रहते हैं।

2: प्रेमानंद महाराज जी के किडनीओं का नाम क्या है?

जैसा कि आपको बताया कि प्रेमानंद महाराज जी ने अपने दोनों किडनी का नाम रखा है, तो मैं आपको बता दें कि उन्होंने अपनी एक किडनी का नाम राधा तो दूसरे किडनी का नाम श्याम रखा है।

3: हम प्रेमानंद महाराज जी से कैसे मिल सकते हैं?

अगर आप प्रेमानंद महाराज जी से मिलना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको सबसे पहले वृंदावन आना होगा, रही बात महाराज जी से संपर्क करने की, तो इसके लिए आप हमारे द्वारा बताए गए ऑफिशियल वेबसाइट में जाकर उनसे संपर्क कर सकते हैं।

4: वर्तमान में प्रेमानंद महाराज जी की उम्र कितनी है?

अगर वर्तमान में प्रेमानंद महाराज जी की उम्र की बात करे, तो वर्तमान के समय में महाराज जी की उम्र 60 वर्ष के आसपास की है, जी लेकिन यह आज भी पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं।

5: प्रेमानंद जी महाराज का जन्म कौन से गांव में हुआ था?

प्रेमानंद जी महाराज का जन्म कानपुर के आखिरी गांव में हुआ था।

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